अमृत स्नान मौनी अमावस्या मे श्रद्धा का जनसैलाब,आस्था के सागर मे संगम के विश्वास मे पुण्य की डुबकी लगाने का महासमागम
(मुदस्सिर खान )
प्रयागराज :महाकुंभ के दूसरे सबसे बड़े अमृत स्नान मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज में करोड़ो श्रद्धालुओं का रेला चला आ रहा है. संगमनगरी की सभी सड़कें फुल हो चुकी हैं,सभी आश्रय स्थल, होटल भर चुके हैं|पूरा संगम क्षेत्र पट सा गया है|प्रशासन ने 15-20 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद के हिसाब से अपनी तैयारियों को मुकम्मल करने में देर रात तक बैठको का दौर जारी रखा इतनी अपार भीड़ देखकर प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं|लगातार ट्रेनों-बसों और अपने साधनों से आ रही भीड़ को होल्डिंग एरिया में रोकना पड़ रहा है|पुलिस की टीम लगातार एनाउंसमेंट कर रही है,भीड़ न लगाने की अपील कर रही है|जल, थल और नभ से सुरक्षा घेरा अभेद्य कर दिया गया है|एआई कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है|संगम नगरी तीर्थ राज प्रयागराज मानवता की अद्भुत सांस्कृतिक धरोहर महाकुम्भ-2025 के दूसरे अमृत स्नान मौनी अमावस्या में सम्मिलित होने वाले सभी साघु , संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है। विरासत एवं विकास को अपने में समेटे नई प्रयागराज की नगरी पूरी दुनिया में फैले सनातनियों का इस महापर्व में शामिल होने का आह्वान कर रही है। 13 से 26 फरवरी, 2025 तक आयोजित होने वाले भारत की आध्यात्मिक, धार्मिक व संस्कृति का महा उत्सव इस महाकुम्भ में मानो श्रद्धांलूओ को समूचे भारत का दर्शन हुआ । इस दौरान धर्म संसद के आयोजन के साथ ही विभिन्न वैचारिक संगोष्ठियों के माध्यम से वृहद सांस्कृतिक विमर्श आयोजित हुई , जिसमें देश एवं विदेश की नामचीन विभूतियों ने भी हिस्सा लिय|मौनी अमावस्या का यह पर्व अपने आप में विभिन्न विशिष्टता समेटे अनेकता में एकता का शंखनाद करता है। यह पर्व बहुस्याम की भावना का साक्षात् निदर्शन है। प्रयागराज महाकुंभ का सारस्वत और धार्मिक अनुष्ठान प्रयाग स्थित त्रिवेणी संगम तट पर लगभग डेढ़ महीने तक अनवरत रूप से संचालित होगा।
इस महापर्व में अब तक 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालूओ ने प्रमुख दो स्नान पर्वों पर संगम स्नान का पुण्य लाभ अर्जित किया है |आज सारी दुनिया में महाकुम्भ के प्रति अपार उत्साह दिख रहा है।अब तक इस बार यह महापर्व सभी कुम्भ पर्वों के सापेक्ष कहीं अधिक दिव्य और भव्य हुआ है,इस धार्मिक समागम ने समूचे विश्व को सनातन भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा, विविधतापूर्ण सामाजिक परिवेश और लोक आस्था का साक्षात्कार कराया, यह हमेशा सुरक्षा, सुविधा और सुव्यवस्था का वैश्विक मानक बनने के साथ ही डिजिटल महाकुम्भ के रूप मे पहचाना जाएगा |गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में अविरल और निर्मल गंगा के दर्शन और पवित्र महाकुम्भ स्नान से कोई भारतवासी वंचित नहीं रहा। संतों के आशीर्वाद और आम जनमानस के सहयोग से इस महाकुम्भ ने कई नए कीर्तिमान रचे।
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